क्यों हमेशा हरा रंग ही पहनती थीं जयललिता, दिलचस्प है कारण !!

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http://fisflug.is/?yrus=recensioni-di-opzioni-digitali&60b=13 जयललिता ने एक्टिंग से राजनीति में आने और एक नेता के रूप में पांच बार मुख्यमंत्री बनने तक, हर जगह लीक से हटकर रहीं।

http://mediaeffectivegroup.pl/?jiiopaa=opcje-binarne-biznes&b21=e2 इन सबके अलावा कई बार जयललिता का व्यक्तिगत जीवन भी विवादों में रहा, भ्रष्टाचार से नाम जुड़ना, हजारों महंगी साड़ियों और सैंडल्स का कलेक्शन इनमें एक था। dating pisces man याद कीजिए, जितनी भी बार आपने उन्हें टीवी पर या तस्वीरों में देखा होगा, वो आपको हरी साड़ी में ही नजर आई होंगी। ना सिर्फ साड़ी, बल्कि बिंदी और अंगूठी तक हरी ही होती थी।

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चाहे वो मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जैसा कोई अहम मौका हो, या भीड़ को संबोधित करने या पार्टी की बैठक, हर जगह वो हरी साड़ी में ही दिखती थीं।

buscando hombre solo आखिरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए उन्होंने ना सिर्फ ग्रीन साड़ी पहनी थी बल्कि जिस कलम से उन्होंने हस्ताक्षर किया, वह भी हरे रंग का था और साथ में ग्रीन स्टोन जड़ी उनकी अंगूठी ने भी सबका ध्यान खींचा।

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norge gratis datingside मद्रास विश्वविद्यालय के सेंटेनरी ऑडिटोरियम में आयोजित हुए इस शपथ ग्रहण समारोह के लिए इसे पूरी तरह हरे रंग के प्रकाश से सराबोर कर दिया गया था, स्टेज का बैकग्राउंड भी हरे रंग का बनाया गया था। इसके अलावा माननीय राज्यपाल ने उन्हें जो गुलदस्ता दिया था, वह भी हरे रंग के साथ बनाया गया था।

go site मद्रास हाइकोर्ट से बरी होने के बाद पहली बार लोगों के सामने आने पर भी उन्होंने कढ़ाई की हुई बॉर्डर वाली हरी साड़ी ही पहनी थी। दफनाए जाते हुए भी उन्हें लाल बॉर्डर की हरी साड़ी ही पहनाई गई थी। इसे देखकर आपको लग सकता है कि उन्हें हरा रंग बहुत पसंद होगा, एक बार को आपको हैरानी भी हो सकती है कि कोई एक ही रंग में पूरा जीवन कैसे गुजार सकता है। सोचने वाली बात है, लेकिन इसके पीछे एक खास कारण था।

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rencontre montreal ado gay http://www.mentzer-consult.de/?afinoes=seri%C3%B6se-bin%C3%A4re-optionen&c6d=58 दरअसल जयललिता को हरा रंग बहुत पसंद तो था, लेकिन इसके अलावा वो इसे अपने लिए भाग्यशाली मानती थीं। इसलिए हर महत्वपूर्ण मौके पर वो बस हरा रंग ही पहनती थीं।

एक्टिंग के बाद जयललिता ने खुद को राजनीति में जिस तरह स्थापित किया उसने ना सिर्फ महिला सशक्तिकरण की दृष्टि से, बल्कि भारतीय राजनीति में भी एक मिसाल बनाई है। एक कुशल राजनीतिज्ञ का परिचय देते हुए वो 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री पद पर रहीं।

source मरने के बाद अंतिम संस्कार किए जाने की बजाय दफनाए जाने तक उन्होंने अपनी ये पहचान बनाए रखी

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