मुस्लिम महिलाओं को लेकर योगी का ने लिया बड़ा फैसला, कट्टरपंथियों में मचा हाहाकार !

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यूपी में मुस्लिमों के लिए भी हुआ शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य..

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में अनिवार्य विवाह पंजीकरण नियमावली को मंजूरी दे दी गई. अब मुस्लिम समेत सभी वर्गों के लिए विवाह पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही बैठक में आठ और फैसले किए गए है. लेकिन कैबिनेट के सबसे अहम फैसले के मुताबिक उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियमावली-2017 को मंजूरी दी है. इस फैसले के लागू होने पर अब सभी वर्गों को विवाह का पंजीकरण कराना जरूरी होगा. अब हर इन्सान को पंजीकरण कराना होगा, चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान..

मौजूदा खबर के अनुसार आज लोकभवन में राज्य सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने संविधान के अनुरूप विवाह पंजीकरण नियमावली बनाई है. यह उत्तर प्रदेश और नगालैंड को छोड़कर पूरे देश में लागू है. कैबिनेट ने इस नियमावली को मंजूरी देते हुए उप्र में इसे लागू करने का फैसला किया है. स्टांप और निबंधन विभाग इसका क्रियान्वयन कराएगा. इतना ही नहीं अब ऑनलाइन पोर्टल में इसकी व्यवस्था रहेगी और अब सभी का विवाह पंजीकरण अनिवार्य होगा.

सभी धर्म के लोगों से बातचीत के बाद किया फैसला !!

मीडिया से बात करते हुए सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि यह फैसला लागू करने के लिए सभी धर्म के लोगों से बातचीत की गई है और इसी दौरान यह आपत्ति भी सामने आई कि निकाह के समय फोटो नहीं लगती है. सरकार ने तर्क दिया कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और पैन में अगर आप लोग फोटो लगा सकते तो विवाह पंजीकरण में क्यों नहीं. सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि मुस्लिम धर्मगुरुओं को जब इस बारे में समझाया गया तो वे मान गए और अब यह व्यवस्था सभी के लिए अनिवार्य कर दी गई है.

कैसे होगा रजिस्ट्रेशन !!

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बता दें कि जिस दिन शासनादेश जारी होगा उस दिन से विवाह पंजीकरण अनिवार्य हो जाएगा. जो पहले से शादीशुदा हैं, उनके लिए पंजीकरण की अनिवार्यता नहीं रहेगी. लेकिन नियमावली जारी होने के बाद जो विवाह होंगे उनका पंजीकरण जरूरी होगा.

मुसलमानों के विरोध से सपा सरकार में नहीं हो सका था लागू !!

बताते चलें कि केंद्र सरकार द्वारा यह व्यवस्था लागू करने के बाद समाजवादी सरकार ने भी इसे उप्र में लागू करने का फैसला किया था. नियमावली बनकर तैयार हो गई थी लेकिन, तभी कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने अखिलेश यादव से मिलकर अपना विरोध दर्ज किया था. इसके बाद ही यह नियमावली लागू करने से रोक दी गई थी.

अब देखना ये होगा कि क्या ये फैसला यूपी में पूरी तरह से लागू हो पाएगा की नहीं. या फिर दोबारा इस कार्य में कोई अड़चन खड़ी हो जाएगी..क्या विपक्ष पार्टी इस फैसले का समर्थन करेगी या फिर विरोध..

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