3rd क्लास की बच्ची ने पकड़ी करोड़ों की कंपनी की ये मिस्टेक, माननी पड़ी गलती !

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हम आप जब भी बाज़ार से कोई सामान लाते हैं। उस पर लिखी बातों को ध्यान से नहीं पढ़ते हैं या फिर पढ़ते भी हैं तो शायद बस वो देखने भर होता है ना कि पढ़ने जैसा, लेकिन हर कोई ऐसा नहीं होता। कुछ दिन पहले थर्ड क्लास में पढ़ने वाली 9 साल की बच्ची ने ‘डाबर’ कंपनी का जूस पीने से मना कर दिया क्योंकि उस पर एक जेंडर को डिफाइन करने वाला वर्ड लिखा हुआ था।

– उस पर टैगलाइन थी, “Something that is good for your child should also make him smile.”
– टैगलाइन पढ़ने के बाद उस बच्ची ने अपने पापा से कहा कि मैं ये जूस नहीं पी सकती। क्योंकि ये लड़कियों के लिए तो है ही नहीं। ये तो लड़कों के लिए है बस।
– पापा के पूछने पर बेटी ने कहा- इंग्लिश ग्रामर के हिसाब से अंग्रेजी में मेल के लिए ‘him’ का इस्तेमाल होता है और फीमेल के लिए ‘her’ का। बच्ची के पिता को भी ये बात गलत लगी।
मेल का ‘डाबर’ ने नहीं दिया था जबाव
– इस बात से बच्ची के पिता ने कंपनी को शिकायती मेल लिखा। जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उसके पिता ने वुमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट मिनिस्टर मेनका गांधी को चिट्ठी लिख डाली।
– मिनिस्टरी ने इस पर कार्रवाई करते हुए ‘डाबर’ से जवाब मांगा। जिसका जवाब उनको बुधवार को मिला।
– डाबर ने इसके जवाब में खुद का बचाव किया। जिसमें उन्होंने कहा कि हम ने ‘him’ का इस्तेमाल जनरल टर्म में किया था। लेकिन अब हम इसे बदलेंगे ।
– ‘डाबर’ ने बताया कि ये टैगलाइन में ये शब्‍द किसी खास जेंडर के लिए नहीं है। इसे गलत समझा जा रहा है।
– ये जेनरल सेंस में प्रयोग किया गया वर्ड है। कंपनी ने ये भी कहा कि वे इस बात के लिए जरूरी कदम उठाएंगे ताकि भविष्‍य में इस तरह की गल‍तफहमी ना हो।
गर्व है कि मैं एक लड़की का पिता हूं
 मिनिस्टरी को लिखे लेटर में मजुमदार ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे एक लड़की के पिता है और उम्मीद है कि कंपनी ‘हमारी बेटियों’ के लिए कुछ करना होगा। मुझे पता है कि यह एक छोटा सा मुद्दा है, लेकिन बात ये है कि लड़कों को ज्यादा इंपोर्टेंस मिल रही है। पीएम नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ’ की बात ऐसे मैसेजों से गलत साबित हो जाएगी

टैगलाइन थी, “Something that is good for your child should also make him smile.” 

125 साल से पुरानी डाबर कंपनी का है 500 करोड़ का कारोबार
बता दें कि 1884 में बर्मन परिवार ने जब एक छोटी आयुर्वेदिक दवा कंपनी के तौर पर शुरुआत की थी। आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में इसे लगभग 125 साल हो चुके हैं।  डाबर के प्रोडक्ट्स पूरी दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉपुलर हैं। सिर्फ विदेश में ही इसका कारोबार करीबन 500 करोड़ का है।

 कंपनी ने ये भी कहा कि वे इस बात के लिए जरूरी कदम उठाएंगे ताकि भविष्‍य में इस तरह की गल‍तफहमी ना हो।

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