BIG NEWS : 92 साल में पहली बार RSS ने किया ऐसा काम,उडी कांग्रेस और ममता की नींद,बदलेगी इनकी हँसी उदासी में !

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आरएसएस वो राष्ट्रवादी संगठन है जो हमेशा से देश सेवा में लगा हुआ है.आपकी जानकरी के लिए हम बता दें देश में तथाकथित सेक्युलर,वामपंथी,कांग्रेसी और ममता बनर्जी जैसे लोग शुरू से आरएसएस का विरोध करते आए हैं पर इस बार आरएसएस ने वो काम किया है जिससे एक ही झटके में सब चित हो गए हैं,अभी कुछ दिन पहले ही सोनिया और राहुल ने आरएसएस के खिलाफ जहर उगला था वैसे ये काम तो हर कांग्रेसी करता आया है  !

कांग्रेस हो या राहुल गाँधी हो सब पूछते हैं आरएसएस ने क्या किया देश के लिए.आज उस कांग्रेस को इसका जवाब भी हम देंगे और ये जवाब इतना जबरदस्त होगा कि अगर कोई भी आरएसएस विरोधी इसे पढ़ेगा तो आरएसएस का मुरीद हो जाएगा.

उससे पहले आपको हम बता दें की आरएसएस ने बड़ा दिमाग लगाते हुए कट्टरपंथी मुस्लिम समुदाय को अलग करते हुए राष्ट्रवादी मुस्लिम समुदाय बोहरा मुस्लिम से और ज्यादा नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर दिया है ये बोहरा मुस्लिम समुदाय शुरू से बीजेपी और मोदी समर्थक रहा है साथ ही इन्हें ना वन्देमातरम से परेशानी है ना भारत माँ की जय बोलने से.92 साल में पहली बार आरएसएस ने बोहरा समुदाय के मुनव्वर यूसुफ को दशहरा में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाकर राष्ट्रवादी बोहरा मुसलमानों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी है.ऐसा करके जो कट्टरपंथी मुस्लिम समुदाय है उनको आरएसएस ने बिलकुल अलग-थलग करने का काम किया है.ममता और कांग्रेस शुरू से कट्टरपंथी मुसलमानों का समर्थन करती रही है और अब इनके बीच ये दिवार खड़ी होगी.

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अब बात करते हैं देश के लिए आरएसएस ने क्या किया तो वो सभी जानते ही हैं आरएसएस से जुड़े लोग हमेशा उस जगह सबसे पहले पहुंचते हैं जहाँ कोई भी विपता आई हो.फिर भी दुनिया में शायद ही किसी संगठन की इतनी आलोचना की गई होगी. वह भी बिना किसी आधार के. संघ के ख़िलाफ़ लगा हर आरोप आख़िर में पूरी तरह कपोल-कल्पना और झूठ साबित हुआ है.

बोहरा मुस्लिम ऐसी टोपी पहनते हैं और हमेशा से बीजेपी का समर्थन करते आये हैं साथ ही ये लोग कट्टरमुस्लिम से दुरी बनाये रखते हैं इनमे और उन सभी दुसरे मुस्लिम समुदाय में बहुत फर्क है.

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1) कश्मीर सीमा पर निगरानी, विभाजन पीड़ितों को आश्रय

संघ के स्वयंसेवकों ने अक्टूबर 1947 से ही कश्मीर सीमा पर पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों पर बगैर किसी प्रशिक्षण के लगातार नज़र रखी. यह काम न नेहरू-माउंटबेटन सरकार कर रही थी, न हरिसिंह सरकार. उसी समय, जब पाकिस्तानी सेना की टुकड़ियों ने कश्मीर की सीमा लांघने की कोशिश की, तो सैनिकों के साथ कई स्वयंसेवकों ने भी अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए लड़ाई में प्राण दिए थे. विभाजन के दंगे भड़कने पर, जब नेहरू सरकार पूरी तरह हैरान-परेशान थी, संघ ने पाकिस्तान से जान बचाकर आए शरणार्थियों के लिए 3000 से ज़्यादा राहत शिविर लगाए थे.

RSS का दूसरा योगदान

8 अगस्त 1930 को मनाए गए गढ़वाल दिवस पर अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ जाकर और धारा 144 तोड़कर जुलूस निकलने पर पूलिस की मार से अनेकों स्वयंसेवक घायल हुए थे ।

RSS का तीसरा योगदान

विजयदशमी 1931 को डॉ. हेडगेवार  जेल में थे । उनकी विदर्भ के अष्टीचिमुर क्षेत्र में संघ के स्वयंसेवको ने सामानांतर सरकार स्थापित कर दी । स्वयंसेवको ने अंग्रेज़ों द्वारा किए गए असहनीय अत्याचारों का सामना किया। उस समय उस क्षेत्र में 1 दर्जन से अधिक स्वयंसेवकों ने अपना जीवन बलिदान कर दिया था ।

साथ ही बता दें कि नागपुर के निकट रामटेक के तत्कालीन नगर कार्यवाह श्री रमाकांत केशव देशपांडे उपाख्य बालासाहेब देशपांडे को आंदोलन में भाग लेने पर मृत्यु दंड सुनाया गया था लेकिन आज़ादी के बाद में अपनी सरकार के समय मुक्त होकर उन्होंने बनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना की थी ।

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RSS का चोथा योगदान

देश के कोने-कोने में स्वयंसेवक जूझ रहे थें।स्वयंसेवको द्वारा दिल्ली- मुजफ्फरनगर रेल लाईन पूरी तरह क्षतिग्रस्त करदी गयी। आगरा के निकट बरहन रेलवे स्टेशन को जला दिया गया| मेरठ जिले में मवाना तहसील पर झंडा फहराते समय स्वयंसेवकों पर पुलिस ने गोली चलायी जिसमे अनेकों घायल हुए थे। बाद में चतुर्थ संघचालक बने पूज्य रज्जु भैया जी ने प्रयाग में आंदोलन किया था।

RSS का पाँचवा योगदान

RSS यानी संघ द्वारा 1942 के आंदोलन में भी माननीय दतोपन्त ठेंगड़ी जी सहित अनेको प्रमुख संघ नेताओ को आंदोलन के लिये भेजा गया था और उन्होंने लगातार बढ़ चढ़कर उसमें भाग लिया था ।

RSS का छठा योगदान

संघ के स्वयंसेवकों ने अक्टूबर 1947 से ही कश्मीर सीमा पर पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों पर बगैर किसी प्रशिक्षण के लगातार नज़र रखी । यह काम न नेहरू-माउंटबेटन सरकार कर रही थी, न हरिसिंह सरकार. उसी समय, जब पाकिस्तानी सेना की टुकड़ियों ने कश्मीर की सीमा लांघने की कोशिश की, तो सैनिकों के साथ कई स्वयंसेवकों ने भी अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए लड़ाई में प्राण दिए थे. विभाजन के दंगे भड़कने पर, जब नेहरू सरकार पूरी तरह हैरान-परेशान थी, संघ ने पाकिस्तान से जान बचाकर आए शरणार्थियों के लिए 3000 से ज्यादा राहत शिविर लगाए थे ।

RSS का सातवाँ  योगदान

दादरा, नगर हवेली और गोवा के भारत विलय में संघ की निर्णायक भूमिका थी. 21 जुलाई 1954 को दादरा को पुर्तगालियों से मुक्त कराया गया, 28 जुलाई को नरोली और फिपारिया मुक्त कराए गए और फिर राजधानी सिलवासा मुक्त कराई गई. संघ के स्वयंसेवकों ने 2 अगस्त 1954 की सुबह पुतर्गाल का झंडा उतारकर भारत का तिरंगा फहराया, पूरा दादरा नगर हवेली पुर्तगालियों के कब्जे से मुक्त करा कर भारत सरकार को सौंप दिया. संघ के स्वयंसेवक 1955 से गोवा मुक्ति संग्राम में प्रभावी रूप से शामिल हो चुके थे. गोवा में सशस्त्र हस्तक्षेप करने से नेहरू के इनकार करने पर जगन्नाथ राव जोशी के नेतृत्व में संघ के कार्यकर्ताओं ने गोवा पहुंच कर आंदोलन शुरू किया, जिसका परिणाम जगन्नाथ राव जोशी सहित संघ के कार्यकर्ताओं को दस वर्ष की सजा सुनाए जाने में निकला. हालत बिगड़ने पर अंततः भारत को सैनिक हस्तक्षेप करना पड़ा और 1961 में गोवा आज़ाद हुआ.

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अब जानिए क्रांतिकारियों से संघ के रिश्ते क्या थे  ? 

क्रांतिकारीयो के बीच संघ के संस्थापक हेडगेवार जी का नाम “कोकीन ” था तथा शस्त्रो के लिये “एनाटमि ” शब्दो का प्रयोग किया जाता था ।  क्रांतिकारीयो से रिश्ते प्रगाढ़ होने के कारण ही 1928 में साण्डर्स की हत्या के बाद राजगुरू को डाक्टर जी ने अपने पास छिपाकर रखा था , ये बात इटली से आयी विदेशी कांग्रेस अध्यक्ष को जान लेनी चाहिए ।

1927 में जब ब्रिटीश सरकार द्वारा भारतीय सेनाओ को चीन भेजने के विरोध का प्रस्ताव हेडगेवार जी ने ही तैयार किया था और उस प्रस्ताव को संघ नेता ला.ख. परांजपे द्वारा सभा के सामने रखा गया था ।और इसी तिव्र विरोध के कारण भारतीय लोगो को चीन जाने से रोका गया था ।

सन 1928 में ‘साइमन कमीशन विरोधी आंदोलन के प्रचार-प्रसार एवं लोगो को जागृत करने का कार्य का दायित्व डा. हेडगेवार जी को सौंपा गया ।

सन 28 अप्रैल 1929 को वर्धा के प्रशिक्षण वर्ग में स्वयंसेवको को सार्वजनीक रूप से कहा गया ” स्वराज्य प्राप्ति के लिये वे अपना सर्वस्व त्याग हेतु तैयार रहे हमारा लक्ष्य स्वराज्य प्राप्त करना है ।

संघ ने 26 जनवरी 1930 को अपने सभी शाखाओ पर स्वतंत्रता दिवस मनाया ।

पुना शिवीर में प पू. गुरूजी तथा बाबा साहेब आप्टे ने अंग्रेजो के विरूद्ध संघर्ष करने का आह्वान किया ।

स्वयंसेवको द्वारा क्रांतिकारीयो व आंदोलनकारीयो को देश भर में शरण दी गयी थी । दिल्ली प्रान्त के माननीय संघचालक श्री हंसराज गुप्ता के निवास पर अरूणा व जयप्रकाश नारायण, पुणे के माननीय संघचालक श्री भाउसाहब देवरस के यहाँ अच्युत पटवर्धन , आंध्र प्रदेश के माननीय प्रान्त संघचालक पण्डित सातवेलकर के यहाँ क्रांतिकारी नाना पाटिल आदि ने आवास के साथ-साथ अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाया गया था और सभी स्वयमसेवकों ने हर आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया था ।

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